fistulated cows. गौ माता के साथ ऐसा क्रूर यवहार? आप भी है कुछ हद तक इसके जिम्मेदार. hole on cows . www.totaltop10.com

गौ माता के साथ ऐसा क्रूर यवहार? आप भी है कुछ हद तक इसके जिम्मेदार

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भारत में ही नही विदेशो में ऐसी बहुत सी जगह है. जहा गायों को गौ माता के रूप में पूजा जाती है. लेकिन ऐसी भक्ति भाव के बाद भी कुछ ऐसी जगह है जहाँ गायों के साथ बहुत बुरा य्वहार किया जाता है उनके साथ बहुत बुरे बुरे परीक्षण किये जाते है और ऐसा य्वहार किया जाता है जैसे वो कोई कार हो और उसे कोई अपने हिसाब से प्रयोग में लाना चाहता हो.

क्या है ये परीक्षण ?

इस परीक्षण में प्रयोगकर्ता गायों के पेट में एक छेद किया जाता है और उसपर एक अंगूठी नुमा यन्त्र जिसे Cannula यानि प्रवेशनी कहा जाता है वो लगा दिया जाता है यह एक विशेस प्रकार का यन्त्र है जिससे किसी के पेट को हमेसा के लिए काट कर उसके पेट को पार्दर्सी बना सके और प्रयोगकर्ता अपनी मन मर्जी के मुताबिक खोल सके. प्रयोगकर्ता के द्वार किया जाने वाला यह परीक्षण बहुत ही भयावह है और यह भी दिखता है की मनुष्य अपनी इच्छाओ की पूर्ति के लिए किस हद तक गिर सकता है.

 

क्यों किया जाता है यह परीक्षण ?

ऐसा कहा जाता है की जिन गायों पर यह परीक्षण किया जाता है उन्हें फेस्टूलेट (Fistulated Cows ) या नालव्रण गाये कहा जाता है. इन गायों के पेट को काट कर और जानवरों के पेट को हटाकर पशु प्रयोगकर्ताओं में इसका बहुत दिनों तक अभ्यास किया जाता है और यहां तक ​​कि पशु चिकित्सा स्कूलों में भी किया जाता है.
बहुत से लोग यह दावा करते है की यह सर्जरी गायों को किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नहीं पहुंचाती है और न ही उनकी आयु को कम करती है. लेकिन इस दावे से यह प्रमाणित नही होता है की जानवरों को इससे कोई असुविधाजनक नही होती है. गाय भी एक पशु है उसके भी प्राण है और उसे भी हमारी तरह ही दर्द का अनुभव होता होता है ऐसे में कुछ लोगो को परीक्षण के नाम पर गायों को कष्ट देने का हक़ कोई नही देता.

फेस्टूलेट गायों के पेट में यह परीक्षण सूक्ष्मजीवों के अध्ययन के लिए किया जाता है और कुछ लोग दावा करते हैं कि यह स्थानांतरण गायों के स्वास्थ्य में सुधार कर सकता है. यह कैसे संबव है की किसी जीव के कुछ अंग हटा कर उसपर परीक्षण करने से किसी के स्वास्थ्य में कैसे सुधार कर सकता है. हां यह कहा जा सकता है की यह प्रक्रिया ज्यादातर मांस और डेयरी उद्योगों को लाभ लेती है जो हम जैसे जानवरों के लिए भोजन और दूध के लिए इन गायों का शोषण किया जाता है और धीरे धीरे इनकी हत्या की जाती है. क्योंकि यह परीक्षण अब मांस और डेयरी उद्योगों में भी किया जाने लगा है.

 

कोई कानून व्यवस्था नही.

दुर्भाग्य से, संघीय पशु कल्याण अधिनियम एकमात्र कानून जो जानवरों की सुरक्षा करता है परंतु इस कानून में कृषि प्रयोगों में इस्तेमाल किए गए जानवरों के लिए कोई सख्त कानून नही बनाया गया है. यानि इन गायों को क्रूरता से बचाने ले लिए कोई कानूनी नहीं है.

गाय बहुत बुद्धिमान और एक संवेदनशील जानवर हैं जो किसी भी कारण से विकृत या उसपर किसी भी प्रकार का कोई परीक्षण किये जाने के लायक नहीं हैं. आज का समय इन जैसे जीवो के लिए बहुत ही कष्ट दायीं है क्योंकि आज लोगों का विचार सीधे एक गाय के पेट में पहुच चूका है हो सकता है कल इन जीवो पर परीक्षण के नाम पर इससे भी ज्यादा कष्ट दिया जाये.
एक शोध के अनुसार कुछ शोधकर्ताओं ने “कैनुलास” नाम की गायों के पेट को काट कर उसपर एक छेद किया.और इस छेद को प्रभावी रूप एक खुले घाव की तरह उसे पुरे जीवन के लिए उसके शरीर में छोड़ दिया.
कहा जाता है की गायों में इस तरह के परीक्षण अनुसंधान उद्देश्यों के पूर्ति के होती है और अब कई किसान अब डेयरी और मांस के य्यापार को जल्दी बढ़ाने के लिए और अधिक दूध और मांस को अधिकतम करने के लिए यह सर्जरी कर रहे है. जो अपने आप में बहुत भयावह है.

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सोशल मीडिया और गाय

आज कल इन्टरनेट और सोशल मीडिया में गाय को बचाने के लिए बहुत से पोस्ट किये जाते है और लोग इसमे गायों पर हो रहे अत्याचार पर अपना गुस्सा भी दिखाते और यह भी दिखाते है की हम कितने सभ्य और दयालु हैं. हम हमारे सामने किसी भी पीड़ित जानवर को देखना पसंद नहीं करते हैं पर सोचने वाली बात यह है की क्या यह सब सोशल नेटवर्क पर कमेंट करने से और अपने गुस्से को दिखा कर कम किया जा सकता है हकीकत में कारखाने के दरवाजों के पीछे जो कुछ भी होता है वहाँ पर हम सब लोग अपनी आँखें बंद कर लेते है और समझने को तैयार नही होते की जानवरो को कितनी तकलीफो का सामना करना पड़ता है.

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